Friday, July 2, 2010

मेरी मधुशाला

हाला = vine; मधुशाला = bar /  tavern ;साकी = bargirl (though it looks derogatory but cdn’t find a better word in english, literal persian meaning is cupbearer)

सुबह मोहिनी अरुण(color of rising sun) है मुख सी, रात का रंग केशो सा काला
इन्द्रधनुष में हंसी तुम्हारी, गुलाबों में रंग अधरों(lips) वाला
ये आदि अनादी प्रकृति सारी, ऋणी तुम्हारी लगती है
नीरस जग को रुचिकर करती, तुम्हारी रंगकोष सी मधुशाला

युगों युगों से नदियों ने सागर को दिया मृदु जल हाला
फिर भी सागर किंचित ना बदला, रहा वह खारा का खारा
मेरे ह्रदय सागर की प्रिये पर, सारी कड़वाहट घुल जावेगी
एक बूँद का दान भी दे दे, यदि तुम्हारी मधुशाला

कब तक मैं खड़ा रहूँगा लेकर ऐसे ही प्याला
कब तक तुम लाओगी बार बार भरकर प्याला
ए साकी तोड़ दो बंधन आज हर प्याले हाला का
बन जाओ सखी मेरी कर दो नाम मेरे ये मधुशाला
 
सूखे छिटके मन सा फिरा मैं दर दर लेकर प्याला
देखे मदिरालय अनेक चखी तरह तरह की हाला
न प्यास बुझी न कोई भी बूँद असर कर पाई मुझ पर
तृप्ति मिली बस तेरी चौखट पर, धन्य हो तेरी मधुशाला
 
रूप सौंदर्य के चक्कर में कितनों ने जीवन जला डाला
बर्बाद हो गया वह पड़ा प्रेम से जिस जिसका पाला
कहने वाले कहते हैं यम बसते तेरे मदिरालय में
आकर तो देखे कोई तुझे औ’ स्वर्ग सी तेरी मधुशाला
 
आँखें तेरी सजी हुई हैं बनकर के साकी बाला
प्रतीक्षा ज्यूँ कर रही हो अधरों में भरकर हाला
बूँद बूँद होठो से प्रिये क्यूँ व्यर्थ मधु गिराती हो
सावन सी बरसो मुझ पर खाली करदो अपनी मधुशाला
 
मंदिर में भगवान मिले और मस्जिद में अल्लाह ताला
मंदिर मस्जिद में जाने पर, पर ध्यान कहाँ लगने वाला
चंचल चितवन प्रिये तुम्हारा ध्यान योग्य ऐसा है कुछ
धूनी(meditation) रमा बैठा हूँ अब पीने को तुम्हारी मदिर हाला
 
दूर लक्ष्य है कितना अभी सोचे पथ पर चलने वाला
ताप खींचे प्राण उसके, आस में सूखा उसका प्याला
मेरे लिए तो अहो प्रिये, पर्याप्त ध्यान तुम्हारा है
तुमसे मिलने की आशा ही, बन जाती है अमृत हाला
 
सुबह जागते ही सूरज ने, पहनाई तुम्हे रश्मि(Sunrays) माला
सिमट गई धूप यूँ मुख पर, जैसे प्याले में हाला
आँखों से अपनी प्रिये इस दृश्य को कैसे न पियूं
कहाँ मिलेगा इन्हें मधु ऐसा, कहाँ मिलेगी ऐसी मधुशाला.
 
ना सोचो तुम ही एक पिलाने वाली, अद्वितीय साकी बाला
न सोचो बिना तुम्हारे, कोई न भर पायेगा प्याला
प्रिये मेरे मदिरालय में आकर तो देखो तुम कभी
प्रेम मधुर है मदिरा मेरी, हृदय है मेरा मधुशाला
 
किस कुशल शिल्पकार ने तुम्हे, इस सुन्दर सांचे में ढाला
हो संतुष्ट कुशल कृति से फिर, भर दी प्राणों की हाला
तुम जैसी रचना वह कभी न कर पाया होगा फिर
लगता है तुम पर ही उसने खाली कर दी अपनी मधुशाला
 
आखें नशीली हैं इतनी ज्यूँ देवलोक की हो हाला
हिरणी सी चंचल हैं फिर भी ओढ़े हैं हया की दुशाला
देखकर जब मन मेरा  कह पियो पियो ललचाता है
बनता है साकी काजल तुम्हारा, नयन बनते हैं मधुशाला

कभी कभी क्यूँ लगता है तुम मिथ्या(illusion) हो साकी बाला
न ही विश्वसनीय हो तुम तुम न ही तुम्हारी मृदु हाला
मोहपाश में बांध सभी को तुम स्वप्न सुखी दिखलाती हो
वो स्वप्न सभी हैं एक भरम, है भरम तुम्हारी मधुशाला

जान कर भी सब मैंने, खुद को भरम में नित डाला
जान कर भी तुझको हरजाई, सारा प्यार न्यौछावर कर डाला
जन कर भी सब कुछ मैंने सच्चाई नशे में है मानी
माना सब कुछ एक भरम, मानी बस एक सच्ची मधुशाला

भूल जाऊं तेरा सब कुछ, हर यत्न मैंने कर डाला
भूल जाऊं हर प्रसंग तेरा एक स्वप्न समझकर काला
पर हर घूँट के साथ सभी घाव हरे हो जाते हैं
न हर पाती दुःख मेरा, जग दुःख हरिणी मधुशाला

विष जैसा लगता है अब सौंदर्य जो कभी था हाला
कड़वाहट भर गई है मन में, जो पिया सच्चाई का प्याला
अच्चा था वह झूंठ ही जिसमें, नाचा करते थे सब संग मेरे
अब रोता हूँ मैं फूट फूट, खड़ी मूक देखती मधुशाला

कल तक थी जो कादंबरी(female cuckoo), अब करती है कानो में छाला
बातें उसकी झूंठी सारी, चुभती हैं हृदय में बन भाला
चींखें अपनी और किसी को सुनने देता नहीं हूँ मैं
एक साकी के घात के कारण क्यूँ बदनाम हो मधुशाला

पड़ा पड़ा अकेला कबसे, प्रतीक्षा करता है प्याला
ना अब तक है साकी आया, ना कोई पीने वाला
कल तक जहाँ बैठ सभी, पियो पियो चिल्लाते थे
भांय भांय अब करती है श्मशान बनी है मधुशाला

बहुत खुश हुआ जब कोई, उठाया उसने कर में प्याला
दुःख में डूबा जब वह, तब भी साथ था वही प्याला
मानव ही दुःख में हाथ पकड़, सुख में छोड़ा करते हैं
साथ बैठ हर खुशी मनाती, हर दुःख बांटती मधुशाला

मृदु  भावों के अंगूरों की जो बना लाया था हाला
प्रेरित हो जिससे में, जीता जीवन की मधुशाला
मधु, हाला, प्याला, साकी को जिसने नयी परिभाषा दी
उन ‘बच्चन’ के चरणों में अर्पित ये मेरी मधुशाला

1 comment:

  1. wonderful poem..beautiful lines in para 6 and 11

    ReplyDelete