Tuesday, July 13, 2010

सब बेकार की बातें हैं……..

(Word meanings : प्रतिभूति – guarantee; परमार्थ – doing good to others)

भला क्या है बुरा है क्या, सब बेकार की बातें हैं

स्वर्ग क्या है नर्क है क्या, कौन देख यहाँ पाया है
कौन है ऐसा जो मरकर वापिस लौट कर आया है
कौन पुण्य प्रतिभूति देता, किसी को स्वर्ग दिलाने की
किस पाप के करण कोई नर्क भोगकर आया है
स्वर्ग नर्क की परिभाषा, मुझे न अब बतलाओ तुम
ये सब तो टाट कमंडल लेकर फिरने वालो की बातें हैं
भला क्या है ……………….

कोई गिरा तो देख उसे, हंसकर खुश हुआ था मैं
मैं गिरा तो खिलखिलाकर, खूब हंसा था वह
ये एक दूसरे के ऊपर, हँसने का चक्र अनंत है
अपने न गिरने की खुशी में कैसे कोई चुप रहे
दुःख शोक प्रकट करने का, व्यवहार मुझे न अब सिखलाओ तुम
ये सब तो तथाकथित संवेदनशीलों की बातें हैं
भला क्या है………………….

किसी के लिए कुछ न किया, तो स्वार्थी जग ने नाम धरा
किसी को जब सब दे बैठा, तो ढोंगी  इसने मुझे कहा
जिसके नाम किया था सब कुछ, कहे वो भी दीवाना मुझे
इस स्वार्थ परमार्थ के चक्कर में जाने मैंने क्या क्या न सहा
दान धर्म और मानवता के, किस्से न अब सुनाओ मुझे
ये सब देवों की हैं, कहाँ मानव के लिए ये बातें हैं
भला क्या है……….

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