Saturday, July 31, 2010

गुदगुदी है ख्यालो सी

गुदगुदी है ख्यालों सी
तमन्ना जैसे सालों की
झूमती ओस की बूंदों जैसी
खिलती गुलाबों की डाली सी

बरसती बातों जैसी वो
छा जाती रातों जैसी वो
चाँद जैसी उसकी अदाएं
नाजुक प्यारे नातों सी वो

चंचल वो बादल सी
आँखों में सजते काजल सी
है थोड़ी सयानी वो
और है थोड़ी पागल सी

धूप के जैसी हँसती वो
फूलों के जैसी लहती वो
नाचे पत्तों के जैसे
और हवा पे चलती वो

बातें उसकी गुड़ की डली
जाने किस मिटटी से बनी
होती अगर उदास वो
लगता सूरज डूबा अभी अभी

धनक(rainbow) के जैसी रंगों भरी
बिन पंखो सी कोई परी
ताजे ताजे खेत के जैसे
महके वो कादंबरी(female cuckoo)

रूठे तो इमली सी खट्टी
करती है पल में ही कट्टी
मनाने से न मनती वो
जैसे हो छोटी सी बच्ची

बिठा सामने तुझे यूँही
बस कुछ भी कहता रहूं
और तेरी प्यारी बातों को
बस यूँही सुनता रहूं

1 comment:

  1. Hi Abhishek
    Good Poem! Arey Thoo khabi bola bhi nahi ki ithna acha likthey ho.. Keep it up!
    - Ravi Sastry

    ReplyDelete