Friday, August 20, 2010

आधी रात की कविता

जब चाँद फलक पर आता है

और तारे गुनगुन करते हैं

जब बागों में जाकर भंवरे

कलियो से भुनभुन करते हैं

जब हवा भी शांत हो स्तब्ध कहीं रुक जाती है

और हल्की सी आहट भी चौकन्ना सा कर जाती है

जब मौहल्ले के चौकीदार की आवाज़ भी गुंजन लगती है

और दूर जाती रेल की छुकछुक भी मनोरंजन करती है

जब कुत्ते भी भौंकना बंद कर जाके कहीं सो जाते हैं

और चारो और खड़े अंधेरे आपस में बतियाते हैं

जब रात का सूनापन मन पर भी छा जाता है

और कर कर चाँद से बातें दिल भी थक जाता है

तब सोचता हूँ क्यूँ मैंने तुमको याद किया

बस एक पल सोचा तुम्हे और सारा दिन बर्बाद किया

शायद अधचेतना(subconsciousness) में ही पड़े रहने देता तुम्हे

तो आधी रात को बैठा ये सब न सोचा करता मैं

6 comments:

  1. Abhi....amazing lines..n best are last four..keep writing beautiful lines. I enjoy reading them.... it seems reflection of my thoughts.

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  2. Dear Abhi,
    would like to read more n more in future...
    Awesome

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  3. aazzaaaaadiyaaannnnnn .....
    awesome dude.....:)

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  4. azaadiyaaaaann........
    awesomw dude....:)

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  5. azzaaadiyaaannnn........
    awesome dude....:)

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