Friday, August 27, 2010

हंसी जो तू

हंसी जो तू

यूँ लगा

बादल गिरा हो कहीं

हंसी जो तू

यूँ लगा

खिल पड़े हो कँवल कई

हंसी जो तू

यूँ लगा

आसमां के रंग सभी

तूने हो

लिए समेट

आँचल में अपने कहीं

हंसी जो तू……………….

 

ये हवा यूँ बह रही या

या बह रही हो जैसे तुम

इस ठंडी ठंडी छुअन से

क्यूँ हो रहा मैं गुम

आगोश में मेरे

है ख्याल तुम्हारा या तुम

ये धुन तुम्हारी बोली की

रहा जो धीरे धीरे सुन

हंसी जो तू………..

 

कच्चे धागे में पिरो के

रखी थी एक माला

हंसी तू कुछ ऐसे

जैसे झटके से टूटी माला

मोती फिर सभी

बिखरे एक एक

तेरी ये हंसी

फैला गयी खुशियाँ अनेक

हंसी जो तू…………………

5 comments:

  1. waah waaah waah .....
    wah ustad waah .. kitni khubsurat abhivyakti hai .... chehre pe muskrahat aa gayi

    ReplyDelete
  2. sabdo ko bhavnao mein lapet kar dil ko chhu lene wali prastuti hai! bahut sundar!

    ReplyDelete