Tuesday, August 31, 2010

मुठ्ठी भर सपने

आशाओं की धूल से समेटकर

उठाये थे हमने

मुठ्ठी भर सपने

भींचकर रखा था हथेली में

इस डर से की

कहीं उड़ा ना ले जाये उन्हें

जलाने वाली तपती हवा

या बहा न ले कहीं

मन को ठंडक देने वाली

रिमझिम रिमझिम बारिश

पर सपने अगर छुपा के रखो

तो किसी मरे हुए की तस्वीर के जैसे

दीवार पर चिपक जाते हैं

और रात दिन टीसते रहते हैं

मुठ्ठी एक दिन खोलनी पड़ी

लगा किसी ने उम्मीदों की स्याही में उंगली डुबोकर

तक़दीर की तख्ती पर लिख दिए थे सपने

लकीरें अब भी हल्की ही थी

हमने मिटने के डर से फिर मुठ्ठी भींच ली

पर हम दौड चले

उन्ही सपनो के पीछे

जो लिखे थे हाथों की लकीरों में

बहुत खुश थे हम दौड़ते दौड़ते

कि अचानक ठोकर लगी

और मुठ्ठी खुल गयी

और तेज बारिश होने लगी

लकीरें अब उस सफ़ेद पानी में घुल रही हैं

हम बेबस से हो ये देख रहे हैं

पर साहस नहीं है

कि मुठ्ठी फिर से बंद कर लें

और फिर से दौड़ना शुरू कर दें

सपनों के साथ साथ ही

बिखरे हुए से लगते हैं हम भी

समझ नहीं आता कि खुद को समेटे

या सपनो को

हिम्मत नहीं होती

फिर से ठोकर खाने की

तो फिर दौड़ना कैसे शुरू कर दें

तो फिर दौड़ना कैसे शुरू कर दें

17 comments:

  1. हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
    कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देनें का कष्ट करें

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  2. ब्लाग जगत की दुनिया में आपका स्वागत है। आप बहुत ही अच्छा लिख रहे है। इसी तरह लिखते रहिए और अपने ब्लॉग को आसमान की उचाईयों तक पहुंचाईये मेरी यही शुभकामनाएं है आपके साथ
    ‘‘ आदत यही बनानी है ज्यादा से ज्यादा(ब्लागों) लोगों तक ट्प्पिणीया अपनी पहुचानी है।’’
    हमारे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।

    मालीगांव
    साया
    लक्ष्य

    हमारे नये एगरीकेटर में आप अपने ब्लाग् को नीचे के लिंको द्वारा जोड़ सकते है।
    अपने ब्लाग् पर लोगों लगाये यहां से
    अपने ब्लाग् को जोड़े यहां से

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  3. @all बहुत बहुत धन्यवाद :)

    @अजय जी एवं सुरेन्द्र जी, मैं अपना योगदान देने का पूरा प्रयास करूँगा, धन्यवाद.

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  4. ब्‍लागजगत पर आपका स्‍वागत है ।

    किसी भी तरह की तकनीकिक जानकारी के लिये अंतरजाल ब्‍लाग के स्‍वामी अंकुर जी,
    हिन्‍दी टेक ब्‍लाग के मालिक नवीन जी और ई गुरू राजीव जी से संपर्क करें ।

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    धन्‍यवाद

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  5. नमस्कार ! आपकी यह पोस्ट जनोक्ति.कॉम के स्तम्भ "ब्लॉग हलचल " में शामिल की गयी है | अपनी पोस्ट इस लिंक पर देखें http://www.janokti.com/category/ब्लॉग-हलचल/

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  6. धन्यवाद जयराम जी, पर हमें वह प्रविष्टि मिल नहीं पाई.

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  7. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति ...सपने ऐसे ही फिसल जाते हैं हाथों से ..

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  8. धन्यवाद संगीता जी......

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  9. चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी रचना 22 - 9 - 2010 मंगलवार को ली गयी है ...
    कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया

    http://charchamanch.blogspot.com/

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  10. सपनो की टूटन को बहुत सुंदर एहसासों से सजाया है. सुंदर अभिव्यक्ति.

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  11. कल गल्ती से तारीख गलत दे दी गयी ..कृपया क्षमा करें ...साप्ताहिक काव्य मंच पर आज आपकी रचना है


    http://charchamanch.blogspot.com/2010/09/17-284.html

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  12. धन्यवाद अनामिका जी, संगीता जी, आशा करता हूँ आपको अन्य रचनाएँ भी पसंद आएँगी, एक बार यहाँ देखे http://diastrophy.blogspot.com/2010/07/blog-post.html

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  13. ब्लॉग जगत में आपका स्वागत है ..बहुत ही खूबसूरत रचना है ,सच ही है सपने ऐसे ही फिसल जाते हैं.

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  14. समझ नहीं आता कि खुद को समेटे

    या सपनो को

    हिम्मत नहीं होती

    फिर से ठोकर खाने की....
    बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति.....
    http://sharmakailashc.blogspot.com

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