Wednesday, September 8, 2010

यादें

बिछा रखी हैं पलकें हमने

आज भी उन राहों पे

जिन पर हंसते हंसते चल कर

तुम मिलने आया करती थी

 

आज भी हम उस पेड के नीचे

जगह रोक कर बैठे हैं

जहाँ बैठ कर तुम अपने

बालों में हाथ घुमाया करती थी

 

वहाँ पे हंसते देख किसी को

दिल मेरा भर जाता है

जहाँ बैठकर तुम मन पर मेरे

हंसी उकेरा करती थी

 

सुनते सुनते बात तुम्हारी

जब कुछ कहने को मैं मुडता हूँ

देख अजनबियों को चारो ओर

मन पर ख़ामोशी सी छा जाती है

 

मानने को मन मेरा

होता नहीं तैयार ये

तुम नहीं हो वहाँ पर

जहाँ तुम रोज हुआ करती थी

 

काश कि होती कोई eraser

मिटा सके जो यादो को

क्योंकि संग तेरी यादों के

अब जीना लगता easy नहीं

8 comments:

  1. अच्छी पंक्तिया है ....

    एक बार जरुर पढ़े :-
    (आपके पापा इंतजार कर रहे होंगे ...)
    http://thodamuskurakardekho.blogspot.com/2010/09/blog-post_08.html

    ReplyDelete
  2. Thanks Samirji, liked your blog too.......

    Thanks GajendraJi, your blog is hilarious...:)

    ReplyDelete
  3. यादें मिटते नहीं,मिटती ।

    ReplyDelete
  4. Thanks Kostubh, AnaJi and Vinayji.

    @Vinayji: सही कहा यादें मिटाए नहीं मिटती......

    ReplyDelete
  5. your thought process is really gud abhishek. this is really lovely poem. keep it up...

    ReplyDelete