Tuesday, September 14, 2010

बातें

बातें तुम से करते करते, बातों की हद हो गई

मीठी तेरी बातें इतनी, कि रात शहद हो गई

 

ख़ामोशी चुपके से जाके, कोने में कहीं सो गई

बातों में तेरी मेरी वो, डूबी ऐसी कि खो गई

तेरी हंसी के धागों से बनाए हुए लिबास में

बातें सजी ऐसी कुछ कि झलक चाँद की हो गई

 

क्या खूब सिलसिला था वो, रुकने कि कवायद(problem) हो गई

वक्त देखने को थमा ऐसा, उसकी खुद से जहद हो गई.

बातें तुम से करते करते, बातों की हद हो गई

मीठी तेरी बातें इतनी, कि रात शहद हो गई

 

बातें मन पे छाई ऐसी कि बातें फलक(sky) हो गई

मासूमियत से महकी ऐसी कि खुद महक हो गई

बातें तेरी झूमी ऐसी कि बातें छनक हो गई

रंगों से तेरे खिली ऐसी कि बातें धनक हो गई

 

हाथ थामकर तेरा जो चले, ख्यालों कि सरहद खो गई

चलते चलते जाने कब रात बीती, कब सहर(dawn) हो गई

बातें तुम से करते करते, बातों की हद हो गई

मीठी तेरी बातें इतनी, कि रात शहद हो गई

7 comments:

  1. मीठी तेरी बातें इतनी, कि रात शहद हो गई .

    बहुत सुंदर ।

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  2. अति उत्तम ! मन को छू गयी आपकी ये पंक्तिया!

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  3. Thanks Sam, welcome to blog hope you'll like other entries as well.........

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