Sunday, October 10, 2010

जीवन तेरा है विजय पथ

 

क्या हुआ जो विजय नाद है आज धीमा पड़ा

क्या हुआ जो विश्व सारा, है मुंह बाएँ खड़ा

क्या हुआ जो पराजय के प्रेत हर ओर नाचते हैं

क्या हुआ जो इस भंवर में तू अकेला है खड़ा

 

कौन चलना सीखा है आज तक गिरे बिना बता

क्यूँ पंगुओं के हास्य से फिर तू डरता है भला

जीवन पथ पर आगे चलना ही देख तेरा धर्म है

मत सोच अब तू पाप पुण्य, बस अपना धर्म निभा

 

चमक सकेगा क्या मेरे जैसा, सूर्य चुनौती देता तुझे

कर हिम्मत और जा मुठ्ठी में भर ले तू उसे

ताप सूर्य कि सजा नहीं, तेरे लक्ष्य कि वो प्रीत है

शीत सा होगा वो स्पर्श, जो होती तेरी जीत है

जल गया तो भी न सोचना, तू खोयेगा पहचान तेरी

जलने का साहस बनेगा, विश्व में पहचान तेरी

सुयश कुयश के बारे में  अब सोचना है व्यर्थ सुन

चीखने दे चमगादडों को, बस अपने मन कि ही सुन

 

माना है ये रात अँधेरी, तारा तक नहीं कोई दिख रहा

बादलों के पीछे बैठा, चाँद भी है डर रहा

उठा मशाल ऐसे में, जोडता चल असंख्य दीये

जल उठें एक साथ सारे, इस अँधेरे को पीयें

 

चाहे तो ब्रह्म भी कर ले आज अपना यत्न सुन

हटना नहीं तू पीछे पर, थम न पाए तेरा प्रयत्न सुन

यौवन है सुन अश्व तेरा, साहस तेरा है युध्द रथ

हुंकार तेरी जय घोष है, जीवन तेरा है विजय पथ

जीवन तेरा है विजय पथ

जीवन तेरा है विजय पथ |

6 comments:

  1. Highly motivating, :)
    thing i needed rite now the most.
    besides it is undoubetedly superb creation :)

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  2. उत्साह से परिपूर्ण सुन्दर अभिव्यक्ति...बधाई...
    http://sharmakailashc.blogspot.com/

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  3. perfect!!!!....i hv no words to say anything...
    god bless u.....

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  4. kamall hai bhai...keep it up.!!! jeevan se paripurn lagte hoo.

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  5. धन्यवाद दोस्तों :)

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