Wednesday, October 20, 2010

हाय रे काजल

 

हाय रे काजल तेरा  काजल…..images

 

पल पल जो ये झपकती हैं

हँसे जो तू तो संग हँसती हैं

बरसती हैं तेरी बातों के संग

मुस्कान के संग खेला करती हैं

जिन आखों की हो गई सारी दुनिया कायल

उनका पहरेदार, तेरा अनोखा काजल

हाय रे काजल तेरा  काजल…..

 

चुप रहती है तू पर बातें ये करती हैं

दिल में तेरे क्या है झपक झपक कर कहती हैं

झूम उठती है जिंदगी आसमान सा बाहों में पाकर

जब पलट पलट कर कनखियों से तू देखा करती है

तेरे सुन्दर मन का दरवाजा हैं तेरी आँखें

और उस दरवाजे की बंधनवार है तेरा काजल

हाय रे काजल तेरा  काजल…..

 

आँखों से तेरी जैसे फूलों कि खुशबू आती है

आँखों कि धूप तेरी, अँधेरे मेरे पी जाती हैं

कभी सुनाती हैं बांसुरी तो कभी वीणा की झंकार मुझे

कभी मीठे मीठे से प्यारे गीत सुरीले गाती हैं

रूप तेरा मधुशाला है तो आँखें उसकी हैं हाला

पीता हूँ जब जब मैं इसे, साकी सा सजता तेरा काजल

आँखों का पहरेदार ये काजल

बंधनवार ये काजल

हाय रे काजल तेरा  काजल…..

2 comments:

  1. 'हाय रे काजल तेरा काजल…..'

    pyar hi pyar dikh rha hai...bhut pyari kavita.....

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