Sunday, November 14, 2010

आँखें मूंदे सुबहो से

 

आँखें मूंदे सुबहो से

सोती  जगती रातो से

करते, हाँ करते हैं बातें तेरी

ख्वाब जो इतने प्यारे हैं

मिलके हँसते सारे हैं

करते, हाँ करते हैं बातें तेरी

भीनी से जो, ये शामें हैं, आती रहे

धीमी सी जो, ये राहें हैं, चलती रहे

हवा का झोंका कोई, उड़ा के तुझे लाया है

ग़मों कि धूप में, खुशियों का तू साया है

हम पर जो छाया है

 

 

खुदा से हमने मांगे थे

पल कुछ हमने चाहे थे

ऐसे, हाँ ऐसे ही खुशनुमा

जेब से उसकी टपके हैं

मुश्किल से जो लपके हैं

ऐसे, हाँ ऐसे ही खुशनुमा

तू साथ है, तो लगती है, झोली भरी

छोटी सी थी, अब लगती है, देखो बड़ी.

हवा का झोंका कोई, उड़ा के तुझे लाया है

ग़मों कि धूप में, खुशियों का तू साया है

हम पर जो छाया है

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